Grah


Bhakti ki Shakti

radha-krishna एक बार एक राष्ट्रपति किसी छोटी सी जेल का निरीक्षण करने पहुंचे. सारे कैदियों को लाइन से खड़ा कर दिया गया | राष्ट्रपति ने पहले कैदी से पूछा कि " तुम मुझसे क्या चाहते हो?" तो वह कैदी बहुत खुश हुआ और बोला कि " हुजूर ! मच्छर बहुत काटते हैं, एक मच्छरदानी दिलवा दीजिये | " ऐसे ही दूसरे ने कहा कि " मै बूढ़ा और बीमार हूँ मेरी मेहनत कम करवा दीजिये " तीसरे ने कहा कि " साहब शरीर में लगाने के लिए तेल दिलवा दीजिये| " तो ऐसे ही सब लोगों ने खाना, कपडा, बिस्तर, साबुन, मंजन आदि की सुविधाएँ मांग लीं और राष्ट्रपति सबके लिए आदेश करते गए | आखिर में जब दो कैदी बचे तो उन्होंने उनमे से एक से ऐसे ही पूछा. वह बहुत होशियार था. उसने सोचा कि यह तो राष्ट्रपति हैं चाहें तो छोड़ भी सकते हैं. उसने कहा कि " हुजूर मुझसे गलती हो गई थी इसलिए काफी सजा भोग ली है, अब कृपया मुझको जेल से छोड़ दीजिये | राष्ट्रपति ने उसकी फाइल मांगी और उसको छोड़ने का आदेश कर दिया | सारे कैदी हक्के बक्के रह गए | हम तो नोन तेल लकड़ी में लगे रहे और ये तो मुक्त हो गया| अब उन्होंने आखिरी कैदी से पूछा, वो पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन था बहुत बुद्धिमान | उसने सोचा कि अगर यहाँ से छूट भी गया तो जाऊंगा कहा, इसलिए वह राष्ट्रपति से बोला कि " हुजूर मै कैद में रहना चाहता हूँ परन्तु मै यह चाहता हूँ कि मुझे कैदी के रूप में आपकी व्यक्तिगत सेवा में लगा दिया जाय| " राष्ट्रपति ने उसका भी आदेश कर दिया, वह मजे से राष्ट्रपति भवन पहुँच गया | राष्ट्रपति के पैर दबाता उनके सारे व्यक्तिगत काम करता और अपनी सेवा से उनका प्रिय हो गया | अब बड़े बड़े लोग उस कैदी की खुशामद में लग गए, सही समय पर बुद्धि का सही उपयोग करके वह कहाँ से कहाँ पहुँच गया | इसी प्रकार हम लोगों को जब मानव देह मिलती है तो मूर्ख लोग भगवान और संतों से भी पैसा, रुपया, लड़का, लड़की, मकान आदि फिजूल की चीजें मांगते रहते हैं | कुछ समझदार लोग संसार में आवागमन से मुक्ति यानि मोक्ष मांगते हैं | लेकिन जो वास्तविक समझदार होते हैं वो लोग केवल भगवान् श्रीकृष्ण की व्यक्तिगत सेवा अर्थात भक्ति अर्थात निष्काम और अनन्य प्रेम ही मांगते हैं | भक्ति की शक्ति ही ऐसी है जो आम को खास बना देती है |

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