चाक्षुषोपनिषद | Chakshushopanishad
Kavach & Stotra

चाक्षुषोपनिषद | Chakshushopanishad

By Amit Behorey30 Sep 2026

चाक्षुषोपनिषद सूर्यदेव की उपासना के माध्यम से नेत्र-ज्योति, शुद्धता और दिव्य प्रकाश की प्रार्थना से संबंधित उपनिषद है। इसमें चक्षु विद्या के मंत्रों के साथ सूर्य के ज्ञान, सत्य और प्रकाश स्वरूप का वर्णन मिलता है।

चाक्षुषोपनिषद | Chakshushopanishad

विनियोग विनियोग - ॐ अस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बुध्न्य ऋषिर्गायत्री छन्दः सूर्यो देवता चक्षूरोगनिवृत्तये विनियोगः । चाक्षुषी विद्या मंत्र ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव । मां. पाहि पाहि । त्वरितं चक्षूरोगान् शमय शमय । मम जातरूपं तेजो दर्शय दर्शय । यथा अहम् अन्धो न स्यां तथा कल्पय कल्पय । कल्याणं कुरु कुरु । यानि मम पूर्वजन्मोपार्जितानि चक्षुः प्रतिरोधकदुष्कृतानि सर्वाणि निर्मूलय निर्मूलय । ॐ नमः चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय । ॐ नमः करुणा-करायामृताय । ॐ नमः सूर्याय। ॐ नमो भगवते सूर्यायांक्षितेजसे नमः । खेचराय नमः । महते नमः । रजसे नमः । तमसे नमः । असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । उष्णो भगवाञ्छुचिरूपः । हंसो भगवान् शुचिरप्रतिरूपः । य इमां चाक्षुष्मतीविद्यां ब्राह्मणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति । न तस्य कुले अन्धो भवति । अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग् ग्राहयित्वा विद्यासिद्धिर्भवति । ॐ नमो भगवते आदित्याय अहोवाहिनी अहोवाहिनी स्वाहा । नेत्र-ज्योति एवं दिव्य प्रकाश की उपासना कृष्ण यजुर्वेदीय चाक्षुषोपनिषद में सूर्यदेव की उपासना के माध्यम से नेत्रों की ज्योति, शुद्धता और दिव्य प्रकाश की प्रार्थना का वर्णन मिलता है। इस उपनिषद में चक्षु विद्या के तीन मंत्र बताए गए हैं। इनके मंत्र-दृष्टा ऋषि अहिर्बुध्न्य हैं तथा इनका छंद गायत्री है। ☀️ सूर्यदेव से प्रार्थना ऋषि सूर्यदेव से प्रार्थना करते हुए कहते हैं— “हे चक्षु के देवता सूर्यदेव! आप हमारी आंखों में तेजोमय रूप से प्रतिष्ठित हों। हमारे नेत्रों के रोगों को शांत करें और अपनी दिव्य स्वर्णिम ज्योति का दर्शन कराएं। हे तेजस्वरूप भगवान सूर्यदेव! हम आपको बार-बार नमन करते हैं। हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलें, अज्ञानरूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर ले चलें और मृत्यु से अमृतत्व की ओर ले जाएं। आपके दिव्य तेज के समान अन्य कोई नहीं है। आप सच्चिदानंद स्वरूप हैं। हम आपको पुनः-पुनः प्रणाम करते हैं। विश्वस्वरूप भगवान विष्णु को भी हमारा नमन है।” 🌅 चाक्षुषोपनिषद की भावना यह उपासना केवल नेत्र-ज्योति की प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्य के दिव्य प्रकाश को ज्ञान, सत्य और चेतना के प्रतीक के रूप में भी देखती है। ☀️ सूर्य का प्रकाश बाहरी अंधकार दूर करता है, और ज्ञान का प्रकाश भीतर के अज्ञान को। 🙏 श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सूर्यदेव का स्मरण करें। आचार्य अमित बहोरे ज्योतिष सलाहकार। अंकज्योतिष सलाहकार । वास्तु सलाहकार प्रयागराज के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं धर्म के मर्मज्ञ है, पिछले 18 वर्षों से ज्योतिष ज्ञान द्वारा हजारों लोगों को सलाह दे चुके हैं । ब्रह्माण्ड एवं ज्योतिष रिसर्च फाउंडेशन द्वारा अनेकों शोध के कार्य चल रहे हैं, साथ ही प्रभु राम सेवा संस्थान द्वारा मंदिर निर्माण का कार्य भी गुरुजी के सानिध्य में चल रहा है ।