Grah


Shukra -The Romance

shukra

शुक्र का नाम
संस्कृत- कवि, काव्य, भृगु, दैत्यगुरु, भृगुसुत, भार्गव, सूरि, उशनसा आदि
अंग्रेजी - Venus (वीनस )
उर्दू- जुहरी, जुहरा

वर्ण – श्वेत
अवस्था – युवा (किशोर)
लिंग – स्त्री
जाति – ब्राह्मण
स्वरुप – तेजस्वी
गुण – रज
तत्त्व- जल
प्रकृति – कफ (मतान्तर से कफ तथा वात )
दिशा- आग्नेय कोण (SE )
धातु – चाँदी
रत्न – हीरा (Diamond )

शुक्र को काल-पुरुष का काम माना गया है | अतः 'कामेच्छा ' का प्रतीक है | ग्रह मंडल में इसे भी मंत्री पर प्राप्त है, स्त्री ग्रह होने के कारण इसे ' मंत्राणी' भी कहा जा सकता है |

आधिपत्य- शुक्र को वीर्य, नेत्र, विषय-वासना, प्रेम, स्त्री, कामेच्छा, मनोरंजन, कला पक्ष, आकर्षण, बड़े वाहन, विलासिता, फ़िल्म-उद्योग,, काव्य कला, मणि, चाँदी, स्फटिक, आभूषण, शारीरिक बल (काम-शक्ति) का अधिपति माना जाता है |

शुक्र से प्रभावित अंग
मनुष्य शरीर के गुप्तांग पर इसका अधिकार है | अंडाशय, गुर्दा, कफ और वीर्य को शुक्र प्रभावित करता है |

शुक्र के रोग
स्त्री-संसर्ग-जन्य रोग, मूत्राशय रोग, प्रमेह, मैथुनिक रोग, मांस सम्बंधित रोग, हार्मोनल रोग

शुक्र भी सदैव ‘ मार्गी ‘ नहीं रहता, अपितु समय समय पर मार्गी, वक्री तथा अस्त होता रहता है | इसकी स्व-राशियाँ वृष और तुला हैं | यह मीन राशि में उच्च का, कन्या राशि में नीच का तथा तुला राशि में 20 अंश तक मूलत्रिकोणस्थ होता है | (मीन राशि में 27 अंश तक परमोच्च और कन्या में 27 अंश तक परम नीच का होता है )

मित्र और शत्रु
बुध, शनि, राहु और केतु शुक्र के नैसर्गिक मित्र हैं |
मंगल और गुरु से शुक्र समभाव रखता है |
सूर्य और चंद्रमा से शुक्र की नैसर्गिक शत्रुता है |

यदि आपकी कुंडली में शुक्र कमजोर है तो पढ़ें शुक्र के उपाय

 

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