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विष्णु सहस्त्रनाम

                           vishnu_40

  l l श्री गणेशाय नमः l l

विष्णु सहस्त्रनाम -स्त्रोत्रम

यस्म स्मरण मात्रेण जन्म सं सार बन्धनात l विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभाविष्ण्वे l l नमः समस्त भूताना मादि भूताय भू भ्रुते l अनेक रूप रूपाय विष्णवे प्रभा विष्णवे l l

श्री  वैशाम्पlयना  उवाचा : श्रुत्व  धर्मं  अशेशेना  पवानानी  च  सर्वशः  | युधिष्टिर  शन्तानावं  पुनरेवा भ्य  भाषातः   || युधिष्टिर  उवाच : किमेकं  दैवतं   लोके  किम  वाप्येकं  परायणं  | स्तुवन्त   कं  कमर्चान्त    प्रप्नुयुर्मा नवा  शुभम  || को  धर्म  सर्व  धर्माणं  भवत  परमो  मत  | किं  जपन  मुच्यते  जन्तुर्जन्म संसार  बन्धनात  || श्री  भीष्म  उवाचा : जगत्प्रभू   देव  देवमनन्तं  पुरुषोत्तमंम   | स्तुवन  नामा  सहस्रेण  पुरुष  सततोत्थित  || तमेव  चर्चायण  नित्यं  भक्त्या  पुरुषम  व्ययम  | ध्यायन  स्तुवन  नमस्यं श्च  यजमान स्तमे वच  || अनादि निधनं  विष्णुम  सर्व  लोक  महेश्वरम  | लोकाध्यक्षं   स्तुवन  नित्यं  सर्व  दुखातिगो    भवेत || ब्रह्मण्यं  सर्वधर्मंज्ञं  लोकानां  कीर्तिवर्धनम  | लोकनाथं  महद  भूतं  सर्व  भूत भवोद  भवम  || एष  में  सर्व  धर्माणं  धर्मो  धिकतमो  मत  | यद् भक्त्या  पुंडारीकाक्षं    स्तवैर   र्चेत्रर  सदा  || परमं  यो  महत्तेज  परमं  यो  महत्तप  | परमं  यो  महद  ब्रह्मा  परमं  य  परायणंम   || पवित्राणां  पवित्रं  यो  मडगलानां   चमडगलम  | दैवतं  देवतानां   च  भूतानां  यो व्यय  पिता  || यत  सर्वाणि  भूतानि  भवन्थ्यादि  युगागमे  | यस्मिंश्च  प्रलयं  यन्ति  पुनरेव  युगक्षये  || तस्य  लोक  प्रधानस्य  जगननाथस्य  भूपते  |

विष्णोर्नाम   सहस्रं  में  श्रुणु  पाप  भायापहम  || यानि  नामानी  गौणानि   विख्यातानि  महात्मन  | ऋषीभि  परी  गीतानी  तानी  वक्ष्यामि  भूतये  || ॐ विश्वं  विष्णुर्व षट   कारो  , भूत भव्य  भवत्प्रभु  | भूतक्रुद  भूतभृदभावो , भूतात्माभूतभावन  || पूतात्मा   परमात्मा  चमुक्तानां  परमा  गति   | अव्यय  पुरुष  साक्षी  क्षेत्राज्ञों क्षर  एवच  || योगो  योगाविदां  नेता  प्रधान  पुरुषेश्वर   | नारासिंह वपु  श्रीमान  केशव  पुरुषोत्तम  || सर्व  शर्व  शिव  स्थाणु  भूतादिर्निधिर  व्यय  | सम्भवो  भावनो  भर्ता   प्रभव  प्रभुरीश्वर  || स्वयंभू  शम्भुरा दित्य   पुष्कराक्षो  महास्वन  | अनादि  निधनो  धाता  विधाता  धातु रुत्तम  ||. अप्रमेयो  हर्षिकेश पदमनाभो  मर प्रभु  | विश्वकर्मा  मनुस्त्वाष्टा   स्थविष्ट  स्थविरो  ध्रुव   || अग्राह्य  शाश्वत  कृष्णो  लोहिताक्ष प्रतर्दन   | प्रभु तस्त्रिक   कुब्धाम  पवित्रं  मडगलं  परम  || ईशान   प्राणद  प्राणों  ज्येष्ट  श्रेष्ट  प्रजापति  | हिरण्य  गर्भो  भू  गर्भो  माधवो  मधु सूदन  || ईश्वरो  विक्रमी  धन्वी  मेधावी  विक्रम  क्रम  | अनुत्तमो  धुर धर्ष  कृताज्ञ कृतिरात्मावान  || सुरेश  शरणं  शर्म  विश्वरेता  प्रजाभव  | अह  संवत्सरो  व्याल  प्रत्यय  सर्व दर्शन  || अजः  सर्वेश्वर सिद्दि  सिद्दि  सर्वा दिरच्युत  | वृषा  कपिर मेयात्मा  सर्व योग  विनि सृत  || वसुर्वसुमना  सत्यसमात्मा  सम्मितसम  |

अमोघः  पुण्डरीकक्षों  वृषकर्मा  व्र्शक्रूति  || रुद्रो  बहु शिरा  बभ्रुर्विश्वयोनि शुचिश्रा | अमृत   शाश्वत  स्थानुर्वरारो हो  महातपा  || सर्वाग  सर्व  विद  भानुर्विश्वक्सेनो  जनार्दन   | वेदों  वेद विदव्यड  गोवेदड गोवेद वित् कवि  || लोकाध्यक्ष  सुराध्यक्षो  धर्माध्यक्ष  क्र्ताकृत  | चतुरात्मा  चतुर्व्यूह श्चतुर्दष्ट्र  चतुर्भुज  || भ्रजिष्णुर्भोजनं  भोक्ता  सहिष्णुर्ज गदादिज   | अनघो  विजयो  जेता  विश्वयोनी  पुनर्वसु  || उपेन्द्रो  वामन  प्रांशुरमोघ  शुचिरुर्जित  | अतीन्द्र  संग्रह  सर्गो  धृतात्मा  नियमोयम  || वेद्यो  वैद्य  सदायोगी  विराहा  माधवो  मधु  | अतीन्द्रियो  महामायो  महोत्साहो  महाबल  || महाबुद्धिर्म हाविर्यो  महाशाक्तिर्म हाद्युति   | अनिर्देश्यवपू  श्रीमानमे  यात्मा  महा दृद्रुक  || महेष्वासो  मही भर्ता  श्रीनिवास  सतां   गति  | अनिरुद्ध  सुरानन्दो  गोविन्दो  गोविंदा  पति  ||

मरिचिर्दामनो  हंस  सुपर्णो  भुजगोत्तम  | हिरण्यनाभ  सुतपा  पदमनाभ प्रजापति  || अम्र्त्यु  सर्व द्रुक  सिंह  सन्धाता  सन्धिमन  स्थिर  | ओदुर्मर्षण  शास्ता  विश्रुतात्मा  सुरारिहा  || गुरुर्गुरुतमो  धाम  सत्य  सत्य  पराक्रम  | निमिशो  निमिष  स्रग्वी  वाचस्पति  रुदाराधि  || अग्रनीर्ग्रा मणी  श्रीमान  न्यायो  नेता  समीरण  | सहस्र  मूर्धा  विश्वात्मा  सहस्राक्षः  सहस्रपत  ||

आवर्तनो  निव्रत्तात्मा  संवृत  सम्प्रमर्दन  | अह  संवर्तको  वह्निरनिलो  धरणीधर || सुप्रसाद  प्रसन्नात्मा  विश्वध्र्ग  विश्वभुग  विभु  | सतकर्ता  सत्कृत  सधुर्ज ह्नुर्नारायाणोनर  || असंक्येयो प्रमेयात्मा  विशिष्ट  शिस्ताक्रूचछुचि | सिद्धार्थ  सिद्ध संकल्प  सिद्धिद  सिद्धि  साधन  || वृषाही  वृषभो  विष्णु र्व्रुषपर्वा  वृषो दर  | वृर्धनो वर्धमानश्चा  विविक्त  श्रुति  सागर  || सुभुजो  दुर्धरो  वाग्मी  महेन्द्रो  वसुदोवसु  | नैकरूपो  ब्र्हदृपो  शिपिविष्ट  प्रकाशन || ओजस्तेजोद्युतिधर  प्रकाशात्मा   प्रतापन   | ऋद्दा स्पष्टाक्षरो  मंत्रश्चंद्र शुर्भास्कर द्युति  || अमृतां  शूदभावो भानु  शशबिन्दु  सुरेश्वर  | औषधं  जगत  सेतु  सत्यधर्म  पराक्रम  || भूतभव्य  भवन्नाथा , पवन  पावनो-नल  | कामहा कामकृत  कान्त , काम-कामप्रद  प्रभु  || युगादी  क्रुद  युगावर्तो  नै कमायो  महाशन  | अद्र्श्योव्यक्त  रुपश्चसहस्र  जिदनन्तजित || इष्टो  विशिष्ट  शिष्टेष्ट  शिकंडी   नहु षो वृष  | क्रोधाहा क्रोध क्र्त्कर्ता  विश्वभाहुर्म हीधर  || अच्युत  प्रथित  प्राण  प्राणदो   वसवानुज  | अपां  निधिर  धिष्टनमप्रमत्त  प्रतिष्टित  || स्कन्द  स्कन्द धरो  धुर्यो  वरदो  वायु वाहन | वासुदेवो  बृहद भानुरा दिदेव  पुरन्दर || अशोकस्तरणस्तर  शूर -शौरिर्ज नेश्वर  | अनुकूल  शतावर्त   पदमी पदमनिभेक्षण  ||

पदमनाभोर विन्धक्ष  पदम गर्भ  शरीर भृत  | महार्दिर  ऋद्धो वृद्धात्मा  महाक्षो गरुड ध्वज  || अतुल  शरम्भो  भीम  समयज्ञो हविर्हरी  | सर्व  लक्षण  लाक्षन्यो  लक्ष्मीवान  समितत्र्त्र || विक्षरो  रोहितो  मार्गो  हेतुर्दा मोदर  सह  | महीधरो  महाभागो  वे गवान -मिताशन  || उदभवऋक्षो भणो  देव  श्रीगर्भः  परमेश्वर  | करणं  कारणं कर्ता विकर्ता  गहनों  गुह  || व्यवसायों  व्यवस्थान  संस्थान  स्थानदो  ध्रुव  | परिर्द्धि  परम  स्पष्टस्तु-पुष्ट शुभेक्षण  || रामो  विरामो  विराटो मार्गो  नेयो  नयो -नय | वीर  शक्ति मतां श्रेष्टो  धर्मो  धर्मं  विदुत्तम   || वैकुंट पुरुष  प्राण प्राणाद  प्रणव  पृथु  | हिरण्यगर्भ  शत्रुघ्नो  व्याप्तो  वायु रधो क्षज  ||

ऋतु  सुदर्शन  काल परमेष्टि  परिग्रह  | उग्र  संवत्सरो  दक्षो  विश्रामो  विश्व दक्षिण  || विस्तार  स्थावर  स्थाणु  प्रमाणं  बीज मव्ययम  | अर्थो -नर्थो महाकोशो  महा भोगो  महाधन  || अनिर्विन्न  स्थाविष्टा -भूर्धर्मयूपो  महामख  | नक्षत्रेंन मिर्न क्षत्री  क्षम-क्षाम समीहन  || यज्ञ   इज्यो  महेज्यश्चा  क्रतु  सत्रं  सता गति  | सर्व  दर्शी  विमुक्तात्मा  सर्वज्ञो  ज्ञान  मुत्तमम  || सुव्रत सुमुख  सूक्ष्म , सुघोष  सुखद  सुह्र्त | मनोहरो  जितक्रोधो  वीर बाहु र्विदारण   || स्वापन  स्ववशो -व्यापी , नै कात्मा नै ककर्म  कृत  |

वत्सरो  वत्सलो  वत्सी , रत्नगर्भो  धनेश्वर  | धर्मगुब  धर्मक्र्द  धर्मी , सद्सत्क्षर  मक्षरम  | अविज्ञाता  सहस्रां शुर्विधता  कृतलक्षण  || गभस्थिनेमि  सत्त्वस्थ  सिंहो  भूत  महेश्वर  | आदिदेवो  महादेवो   देवेशो  देवाभ्रुद  गुरु  || उत्तरों  गोपतिर्गो प्ता ज्ञानागम्य  पुरातन  | शरीर  भूत  भृद  भोक्ता  कपीन्द्रो  भूरी दक्षिण  || सोमपो -मृतप सोम  पुरुजित  पुरुसत्तम  | विनयो  जय  सत्य संधो  दशार्ह  सत्वताम पति  || जीवो  विनयिता  साक्षी  मुकुन्दो -मितविक्रम  | अम्भो  निधिर  नन्तात्मा  महोद  धिशयोन्तक || अजो  महार्ह  स्वाभाव्यो  जितामित्र  प्रमोदन  | आनन्दो -नन्दनो -नन्द  सत्यधर्मा  त्रिविक्रम  || महर्षि  कपिलाचार्य  कृतज्ञो मेदिनी  पति  | त्रिपदस्त्रि दशाद्यक्षो   महा श्रुंगा  कृतान्त  कृत  || महावराहो  गोविन्द सुषेण  कन   काड गदी   | गुह्यो  गभीरो  गहनों , गुप्त   श्चक्र  गदाधर   || वेधा  स्वांगो  जित  कृष्णो   दृढ  संकर्षणो च्युत  | वरुणो -वरुणो -व्रक्ष  पुष्कराक्षो  महमान  || भगवान  भागाहानंदी  वनमाली  हलायुध  | आदित्यो  ज्योतिरा दित्य  सहिष्णुर्गातिसत्तम  || सुधन्वा  खण्डपर शुर्दा रुणो  द्रविण  प्रद | दिवस्प्रुक  सर्व दृग  व्यासो  वाचास्पतिर योनिज  || त्रिसामा  सामग साम  निर्वाणं  भेषजं  भिषक  | संन्यसकृच्छम  शान्तो  निष्ठा शान्ति  परायणंम   || शुभंगास  शान्तिद स्त्राष्ट  कुमुद  कुवलेशय  |

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