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Basant Panchmi (बसंत पंचमी)

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बसंत पंचमी पर्व माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है, इसे ऋषि पंचमी भी कहते हैं |

भारत वर्ष में छः ऋतुएं होती है और बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है | ऋतुराज बसंत की महत्ता हर क्षेत्र के लिए है | इस दिन हर उम्र का व्यक्ति चाहे वो बच्चा हो या युवा, प्रौढ़ हो या वृद्ध सभी के ह्रदय उल्लास से भर जाता है | प्रकृति का सुन्दर विकसित रूप आखों को लुभाने लग जाता है | इस समय वन-उपवन-वाटिका अपने रूप लावण्य से भर जाती है | आमों में बौर आ जाते हैं | भवरों की गुंजार और कोकिल की सुमधुर ध्वनि ' कुहू-कुहू ' सुनाई देने लगती है | रंग बिरंगी तितलियाँ पीली-पीली सरसों के फूल पर मडराती है | जौ और गेहूं की बालियां आने लगती है | इस तरह प्रकृति अपने इस अद्वितीय सौंदर्य के साथ नृत्य कर उठती है | हर वर्ग के लिए या पर्व महत्वपूर्ण है |

आज के इस भागम भाग के दौर में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे है हम वैलेंटाइन डे मानते हैं पर बसंत उत्सव नहीं मानते इसी बसंत पंचमी से होली तक का समय बसंत-उत्सव कहलाता है, इसी में से एक दिन निकाल कर अंग्रेजों ने  वैलेंटाइन डे बना दिया है क्योंकि हम धीरे धीरे अपनी संस्कृति छोड़ कर अंग्रेज होते जा रहे है इसी लिए नयी नयी परेशानियों से दो चार होना पड़ता है |

हिन्दू संस्कृति मानव संस्कृति है हर त्यौहार का अपना महत्व है | यह दिन प्रकृति का अनुपम दिन है इसको समझें और समझाएं ...

बसंत पंचमी पर क्या करें ?

बसंत पंचमी वाले दिन भगवान विष्णु, माता सरस्वती और कामदेव की उपासना का विधान है |

इस दिन प्रातः जल्दी उठ कर नित्यक्रिया से निपटने के बाद

 शरीर में तिल का उबटन मलना  चाहिए और

फिर तिल युक्त जल से स्नान करना चाहिए,

इसके बाद उत्तम पीले वस्त्र पहनने चाहिए और

भगवान् विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए |

इसके बाद पितृतर्पण करना चाहिए और

ब्राह्मणों को श्रद्धा के साथ भोजन करवाना चाहिए |

इसके बाद सबसे पहले गुलाल उड़ाना चाहिए |

सरस्वती पूजन

ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार श्री कृष्ण भगवान ने माता सरस्वती पर प्रसन्न हो कारक उनको यह वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जायेगी, इसी वरदान स्वरुप उनकी आराधना होती है |

माता के पूजन के एक दिन पूर्व नियमपूर्वक रहना पड़ता है, दूसरे दिन नित्य कर्मों से निपट कर भक्तिपूर्वक कलश की स्थापना की जाती है | इसके बाद गणेशजी, सूर्य, विष्णु और शिवजी की पूजा करके माता सरस्वती की उपसना की जाती है और इसके बाद गुलाल उड़ाया जाता है, माता सरस्वती की उपासना से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है |

कामदेव पूजन बसंत पंचमी पर कामदेव पूजा का भी विधान है, कामदेव को केवल काम से जोड़ कर ही नहीं देखना चाहिए | कामदेव और रति की उपासना से गृहस्थ जीवन में आ रही परेशानियों का शमन होता है | जीवन में नए जोश, उत्साह और उल्लास का संचार होता है | इस दिन कामदेव और रति का ध्यान करके विविध प्रकार के फल, पुष्प और पत्रादि समर्पण करना चाहिए | इससे जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है |

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