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Dipawali Pujan Vidhi

दीपावली पूजन की विधि

7-नवंबर-2018

 
शुभ दीपावली पूजन मुहूर्त (चौघडिया)
प्रातः मुहूर्त
अमृत =10:22-11:46
शुभ = 13:10 - 14:34
संध्या मुहूर्त
(शुभ,अमृत,चर ) = 17:22 - 22:10
 
प्रदोष काल मुहूर्त
प्रदोष काल 17:22 से 19:56
वृषभ लग्न = 18:29 से 20:26
 
महानिशा काल पूजन मुहूर्त (अमावस्या की समाप्ति के कारण मान्य नहीं )
महानिशा काल = 23:21 से 24:12+
सिंह लग्न =  24:58 से 27:12+
उषाकाल मुहूर्त = 28:35+ - 30:12+
 

पिछले ब्लॉग में पूजन सामग्री  और दीपावली पूजन की तैयारी के बारे में बताया गया था आज पूजन विधि के बारे में बताने जा रहे हैं, इसको अपना कर आप माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं -

पूजा की विधि

दीप स्थापना -सर्वप्रथम एक घी का दीपक जला लें | पूजन सामग्री को पवित्र करना -सबसे पहले स्वयं को पवित्र और पूजन सामग्री को शुद्ध करने के लिए जल को स्वयं और पूजन सामग्री पर छिडकें और मंत्र पढ़ें -

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

आसान पवित्र करना -अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥   ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

आचमन - अब आचमन करें (जल को तीन बार हाथ में ले कर पी लें ) ॐ केशवाय नमः ॐ नारायणाय नमः ॐ माधवाय नमः

अब हाथों को धो लें

ॐ हृषिकेशाय नमः

संकल्प - आप हाथ में अक्षत लेकर, पुष्प और जल ले लीजिए। कुछ द्रव्य भी ले लीजिए। द्रव्य का अर्थ है कुछ धन। ये सब हाथ में लेकर संकल्प मंत्र को बोलते हुए संकल्प कीजिए कि मंत्र ऊँ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: अद्य मासोत्तमे मासे कार्तिकमासे कृष्णपक्षे पुण्यायाममावास्यायां तिथौ गुरु वासरे(अपने गोत्र का उच्चारण करें)............गोत्रोत्पन्न: (अपने नाम का उच्चारण करें )..........शर्माअहं श्रुतिस्मृति पुराणोक्त फलावाप्ति कामनया ज्ञाताज्ञात कायिक वाचिक मानसिक सकल पाप निवृत्ति पूर्वकं स्थिरलक्ष्मीप्राप्तये श्रीमहालक्ष्मी प्रीत्यर्थं महालक्ष्मीपूजनं कुबेरादीनां च पूजनं करिष्ये। तदड्त्वेन गौरीगणपत्यादिपूजनं च करिष्ये।

प्रतिष्ठा- बाएं हाथ में चावल लेकर निम्नलिखित मंत्रों को पढ़ते हुए दाहिने हाथ से उन चावलों को प्रतिमा पर छोड़ते जाएं- ऊँ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञ समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयन्तामोम्प्रतिष्ठ।। ऊँ अस्यै प्राणा: प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा: क्षरन्तु च। अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन।। सर्वप्रथम भगवान गणेश- लक्ष्मी का पूजन करें। इसके बाद कलश पूजन, नवग्रह तथा षोडशमातृ का (सोलह देवियों का) पूजन करें। तत्पश्चात प्रधान पूजा में मंत्रों द्वारा  महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें।

अब श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीलक्ष्मी से क्षमा-प्रार्थना करें।

न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो।  यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों। श्रीलक्ष्मी को यह सब पूजन समर्पित है....

इसके बाद आरती करें |

पूजन संपन्न करने के उपरांत पूरे घर को दीयों से सजा दें कोई भी कोना अँधेरे में नहीं होना चाहिए घर के मंदिर, आँगन में पूरी रात दिया जलता रहना चाहिए | एक दिया किसी मंदिर, एक पीपल के पेड़ की नीचे, एक बेल पेड़ के नीचे और एक चौराहे पर जलाने से भी शुभता बढ़ती है | दीपक जलाने के बाद कुछ आतिशबाजी भी अवश्य करें और हाँ आज की रात सोना मतलब भाग्य को खोना है, रात्रि जागरण करें | आप सभी को एक बार फिर दीपावली की हार्दिक शुभकामना आपका मित्र

अमित बहोरे

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