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नवार्ण-मंत्र साधना

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नवार्ण-मंत्र साधना

नवार्ण महामंत्र की विशेषताएं व जप नियम

१.  शक्ति साधना के महत्त्वपूर्ण मंत्रों-स्तोत्रों में इस नवार्ण-मंत्र का प्रमुख स्थान है।

२.  यह नवार्ण मंत्र माता दुर्गा सहित उनके तीनों स्वरूपों महासरस्वती, महालक्ष्मीमहाकाली को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद व दर्शन प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है ।

३.  इसकी पूर्णता प्राप्त करके जीवन में सम्पूर्ण पूर्णता (मोक्ष) प्राप्त की जा सकती है।

४.  इसके माध्यम से मनुष्य अपनी कुण्डलिनी चेतना को जाग्रत् कर सकता है।

५.  इस नवार्ण-मंत्र का जाप स्त्री-पुरुष, बच्चे-बूढ़े कोई भी कर सकते हैं।

६.  इसका जाप माला के द्वारा या बिना माला के भी किया जा सकता है, दोनों का फल बराबर है।

७.  इसका जाप रुद्राक्ष, स्फटिक, मूंगा, कमलगट्टे, हकीक या मोती की माला से किया जा सकता है। मगर रुद्राक्षस्फटिक मिश्रित माला से जाप करना ज्यादा उपयुक्त होता है या कमलगट्टे, स्फटिकमूंगे की बनी माला भी प्रभावक होती है।

८.  इस नवार्ण नवार्ण-मंत्र की जप संख्या सवा लाख है अर्थात इसका जप कम से कम सवा लाख है और द्वितीय पुरश्चरण चौबीस लाख जप का है |

९ . कलियुग में समय की कमी से आप नवरात्रों में प्रतिदिन एक / तीन / नौ / अट्ठारह / सताईस/ चौअन/ एकसौआठ माला कर सकते हैं |

१०. नवरात्री के प्रथम दिन जो संकल्प ले लिया उसी अनुसार जप करें उदाहरण - यदि आपने संकल्प लिया कि मैं रोजाना माता के नवार्ण-मंत्र की नौ माला का जप करूँगा तो आपको पूरे नवरात्र रोजाना नौ माला का ही जाप करना होगा आप किसी दिन इसको बढ़ा या घटा नहीं सकते |

११. जप का स्थान एकांत वाला होना चाहिए, या जहाँ माँ का कलश स्थापना हुई है और जहाँ अखंड ज्योत जल रही है वहां जप करें |

१२. शारीरिक शुद्धि के साथ साधना काल में मानसिक शुद्धि का भी ध्यान रखना होगा | ब्रह्मचर्य का पालन करें व्रत रखें शांत रहे किसी विवाद में ना पड़ें मिथ्या ना बोलें लाल वस्त्र और आसान का प्रयोग करें जप के दौरान एक दीप जलता रहना चाहिए जप के दौरान मोबाइल अपने से दूर रखें जप के दौरान आपको कोई न टोके

१३. नवमी वाले दिन दशांश हवन अवश्य करें  |

१४. कन्या-पूजन अवश्य करें |

१५नवार्ण-मंत्र का जाप करते समय माता दुर्गा के किसी भी स्वरूप का चिन्तन-पूजन किया जा सकता है। साथ ही माता सरस्वती, माता लक्ष्मीमाता काली के स्वरूपों का चिंतन भी किया जा सकता है व उनकी छवि का पूजन किया जा सकता है।

१६. किसी समस्या के निदान के लिए यदि पूर्ण लगन से सवा लाख मंत्र का जाप, अनुष्ठान के रूप में किया जाय, तो तत्काल सफलता प्राप्त होती है

१७ . नवरात्र बाद भी इसका प्रतिदिन 108 बार जाप किया जाय, तो माता भगवती की कृपा बनी रहती है।

माता के इस अद्भुत नवार्ण-मंत्र के बारे में अपनी क्षमतानुसार मैंने आपको बता दिया है, माता आपकी आराधना से प्रसन्न हो ऐसी कामना करता हूँ | बस कलियुग मानवों से इतनी विनती है कि अनुष्ठान के समय पूर्ण सात्विकता बनाये रखें | माता जगत जननी है वह हम सब को अच्छे से पहचानती है, अनुष्ठान काल में शुद्धता और नियम का पालन करना अतिआवश्यक है |

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